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117 साल बाद दुनिया देखेगी कोहिनूर की बहन “दरिया नूर” | बांग्लादेश का छिपा हीरा

कोहिनूर की बहन “दरिया नूर”: 117 साल बाद बांग्लादेश का छिपा हुआ हीरा दुनिया के सामने

दुनिया को जल्द ही एक ऐसा रत्न देखने को मिलने वाला है, जो सौ से भी अधिक वर्षों से रहस्य के पर्दे में छिपा हुआ था। यह हीरा है “दरिया नूर”, जिसे कोहिनूर की बहन कहा जाता है।
117 साल बाद, बांग्लादेश सरकार इस अनमोल हीरे को दुनिया के सामने लाने की तैयारी में है।

कोहिनूर और दरिया नूर का रिश्ता

भारत का प्रसिद्ध हीरा कोहिनूर तो दुनिया भर में मशहूर है, जिसे अंग्रेज भारत से लेकर ब्रिटेन चले गए और आज यह ब्रिटिश क्राउन ज्वेल्स का हिस्सा है।
लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि कोहिनूर की एक “बहन” भी है — दरिया नूर।
दोनों ही हीरे कभी भारत की गोलकुंडा की खानों से निकाले गए थे और एक समय में महाराजा रणजीत सिंह के पास थे। कहा जाता है कि वे इन दोनों हीरों को अक्सर अपने हाथों में पहनते थे।

बांग्लादेश में कैसे पहुंचा यह हीरा

इतिहास के पन्ने बताते हैं कि ब्रिटिश शासन के दौरान दरिया नूर को ब्रिटिश क्राउन के पास भेजा गया था, लेकिन उसे पसंद न आने के कारण इसे भारत लौटा दिया गया।
इसके बाद ढाका के नवाब ख्वाजा अमीनुल्लाह ने इसे 1862 में खरीद लिया।
बाद में, नवाब सलीमुल्लाह ने इसे ₹14 लाख के कर्ज के बदले पूर्व बंगाल और असम प्रांत की सरकार के पास गिरवी रख दिया।
लेकिन यह कर्ज कभी चुकाया नहीं गया और तब से यह हीरा सोनाली बैंक की तिजोरी में सुरक्षित पड़ा रहा।

117 साल बाद खुलने वाला राज़

अब बांग्लादेश सरकार ने कैबिनेट सचिव अब्दुल रशीद की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति बनाई है, जो सोनाली बैंक की उस तिजोरी का निरीक्षण करेगी जहाँ यह हीरा 117 साल से बंद है।
समिति में वरिष्ठ नौकरशाहों, सुरक्षा अधिकारियों और हीरा विशेषज्ञों को शामिल किया गया है ताकि इस बेशकीमती रत्न का सही मूल्यांकन किया जा सके।

दरिया नूर की खासियत

वजन: लगभग 26 कैरेट

आकार: आयताकार, सपाट सतह वाली टेबल-शेप

उत्पत्ति: गोलकुंडा खान, भारत

इतिहास: युद्ध, तोहफे और राजनीतिक लेन-देन की विरासत

दरिया नूर को कभी खरीदा या बेचा नहीं गया; यह हमेशा सत्ता परिवर्तन या युद्धों के परिणामस्वरूप हाथ बदलता रहा — ठीक वैसे ही जैसे कोहिनूर का इतिहास रहा है।

अब पूरी दुनिया की नजरें

अब जब बांग्लादेश इसे सार्वजनिक करने जा रहा है, तो पूरी दुनिया की निगाहें ढाका पर टिकी हैं।
यह केवल एक हीरा नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की साझा ऐतिहासिक धरोहर है।
अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो जल्द ही दुनिया कोहिनूर की बहन दरिया नूर की पहली झलक देख पाएगी — एक ऐसा हीरा जिसने इतिहास को अपने भीतर छुपा रखा है।

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