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US Govt Shutdown: $37 ट्रिलियन कर्ज और वैश्विक अविश्वास से घिरा अमेरिका

​अमेरिकी सरकारी ‘शटडाउन’: वित्तीय संकट और वैश्विक विश्वास में गिरावट
​हाल ही में, संयुक्त राज्य अमेरिका में एक बार फिर सरकारी ‘शटडाउन’ की स्थिति बन गई है। यह संकट उस वक्त गहराया है जब अमेरिकी अर्थव्यवस्था पहले से ही भारी वित्तीय तनाव से जूझ रही है। संयोग से, अमेरिका में छींकने पर ‘गॉड ब्लेस यू’ कहने का जो रिवाज है, अब लाखों अमेरिकी इस मुश्किल घड़ी में वाकई एक-दूसरे के लिए दुआ कर रहे हैं।
​शटडाउन का कारण और प्रभाव
​सरकारी शटडाउन तब होता है जब अमेरिकी कांग्रेस निर्धारित समय सीमा (आमतौर पर 1 अक्टूबर को नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत) तक सरकार को चलाने के लिए वार्षिक बजट या फंडिंग बिल पास नहीं कर पाती है।
​तत्काल प्रभाव: फंडिंग की कमी के कारण, जरूरी सेवाओं (जैसे सुरक्षा, चिकित्सा और हवाई यातायात नियंत्रण) को छोड़कर अधिकांश सरकारी विभागों को बंद कर दिया गया है।
​कर्मचारियों पर असर: 9 लाख से अधिक स्थायी सरकारी कर्मचारियों को बिना वेतन के घर बैठने का निर्देश दिया गया है। उनकी तनख्वाह पर संकट छा गया है, जिससे लाखों परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई है।
​अमेरिका पर रिकॉर्ड कर्ज और वित्तीय दबाव
​यह शटडाउन ऐसे समय में आया है जब अमेरिका का राष्ट्रीय ऋण (National Debt) रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच चुका है, जो $37 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है।
​ब्याज का बोझ: यह कर्ज इतना बड़ा है कि इसके ब्याज का भुगतान करना भी एक चुनौती बन गया है। यह अकेला ब्याज का खर्च अमेरिका के समग्र रक्षा खर्च (Defense Spending) से भी अधिक हो गया है, जिसने देश के वित्तीय ढांचे पर भारी दबाव डाला है।
​अर्थव्यवस्था पर टिप्पणी: पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पहले भारत की अर्थव्यवस्था पर आलोचनात्मक टिप्पणियाँ की थीं, लेकिन मौजूदा अमेरिकी वित्तीय संकट ने उनकी अपनी अर्थव्यवस्था के सामने गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
​वैश्विक विश्वास में कमी: सोने की बढ़ती मांग
​अमेरिकी वित्तीय अनिश्चितता का असर अब वैश्विक बाजार पर भी दिख रहा है।
​डॉलर और ट्रेजरी पर अविश्वास: दुनिया भर के सेंट्रल बैंक (केंद्रीय बैंक) अब तक सबसे सुरक्षित माने जाने वाले अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड और डॉलर में निवेश करने से कतरा रहे हैं।
​सोने की खरीदारी: इसके बजाय, ये बैंक बड़े पैमाने पर सोना खरीद रहे हैं। जुलाई में, भारत के भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने भी अमेरिकी डॉलर खरीदने के बजाय सोने में विश्वास दिखाया। इस बढ़ती मांग के कारण सोने के दाम आसमान छू रहे हैं, जो अमेरिकी डॉलर पर वैश्विक निर्भरता में कमी का संकेत है।
​ट्रम्प के कार्यकाल में शटडाउन का इतिहास
​सरकारी फंडिंग को लेकर गतिरोध (stalemate) अमेरिका में नया नहीं है। पिछले 50 वर्षों में, फंडिंग बिल में देरी के कारण 20 से अधिक बार शटडाउन लागू किया गया है।
​सबसे लंबा शटडाउन: डोनाल्ड ट्रम्प के पिछले कार्यकाल में ही तीन बार शटडाउन हुए थे, जिसमें 2019 का शटडाउन 35 दिनों तक चला था। उस शटडाउन से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को $25,000 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ था।
​मौजूदा अनिश्चितता यह सवाल खड़ा करती है कि कर्ज और वैश्विक अविश्वास से घिरा अमेरिका अपनी वित्तीय स्थिरता को कैसे बहाल कर पाएगा, और यह शटडाउन कितने दिनों तक जारी रहेगा।

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